रानी दुर्गावती बालिका छात्रावास, रायसेन

29-Mar-2017


बालिका छात्रावास रायसेन

 रानी दुर्गावती बालिका आवासीय छात्रावास,रायसेन
मध्यप्रदेश के रायसेन जिला मुख्यालय पर वनवासी बालिकाओं के लिए निशुल्क छात्रावास 1 जुलाई 2011 से प्रारम्भ किया गया है | जिसमे अभी 140 बालिकाओं की शिक्षा का प्रबंध किया गया है |छात्रावास अब पूर्ण विद्यालय के रूप में प्रारंभ हो गया है. इस छात्रावास में वनवासी क्षेत्र की बहिने अध्यनरत है. प्राचार्य के रूप में सुश्री शाम्भवी शर्मा एवं संस्थान के सचिव श्री नीलेश चतुर्वेदी बहिनों के संस्कारपक्ष पर सतत प्रयत्न करते रहते है.वर्त्तमान में १३9 बहिने अध्यनरत है.

रानी दुर्गावती अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावास
सांची मार्ग, गोपालपुर रायसेन (म.प्र.)

                       
देश विविध प्रदेषों में अनेक क्षेत्र हैं जहां लाखों की संख्या में गिरिवासी व वनवासी समाज के लोग रहते हैं। इन समाजों में रहने वाली बालिकाओं में धर्मनिष्ठा, जीवन की सरलता, श्रद्धा व विनम्रता जैसे सद्गुणों की खान पाई जाती है साथ ही वे प्रतिभाओं की धनी भी होती हैं परन्तु जीवन की आवष्यक व आधुनिक सुविधाओं से वंचित इन क्षेत्रों में इन बालिकाओं को अपनी प्रतिभा का प्रदर्षन करने का अवसर प्राप्त नहीं हो पाते हैं औेर वह समाज की मुख्य धारा से अलग हो जाती हैं।
  विद्याभारती षिक्षा के क्षेत्र में अपने विभिन्न आयामों के माध्यम से  समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए संस्कारित, सस्ती व सुलभ षिक्षा उपलब्ध कराने के लिए भगीरथी प्रयास कर रही है। इन्हीं प्रयासों में जनजाति क्षेत्र की बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए और भारतीय संस्कृति व भारतीय जीवन मूल्यों से युक्त षिक्षा के माध्यम से बालिकाएॅ अपने जीवन में स्वस्थ्य, सबल, व सषक्त बनें उनकी बुद्धिमत्ता, ज्ञान-सम्पदा व विवेक शक्ति प्रखर बने, उनके व्यवहार में सद्गुणों व सुप्त क्षमताओं का विकास हो सके इन्हीं उद्देष्यों की पूर्ति हेतु सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान म.प्र. के द्वारा ष्जनजातीय बालिकाओंष् के लिए गुरूकुल षिक्षा पद्धति पर आधारित ष्रानी दुर्गावती अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावासष् की स्थापना सन् 2011 में की गई। वर्तमान में यह छात्रावास ष्भाउराव देवरस सेवा न्यास म.प्र. भोपालष् के द्वारा सहयोग से संचालित होकर नए आयामों को छू़ रहा है।

वर्तमान स्वरूपः- यह छात्रावास स्वयं की 10 एकड़ भूमि पर शहर के कोलाहल से दूर प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच सुसज्जित भवन एवं आध्यात्मिक वातावरण में संचालित है। जिसमें वर्तमान में 140 बहिनें अध्ययनरत है।
एक दृष्टि में:-
जिला तहसील ग्राम   कुल बहिनें
07           15          78        140

कार्यक्रमः-बालिकाओं में भारतीय संस्कृति, रीति एवं परम्पराओं के साथ उनका सर्वांगीण विकास होे इस दृष्टि से वर्ष भर विभिन्न उत्सव ,पर्व एवं महापुरूषों की जयन्तियों का आयोजन विस्तृत योजना बनाकर  किया जाता है। साथ ही शारीरिक, प्राणिक मानसिक, बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए छात्रावास की दिनचर्या में विभिन्न कार्यक्रमों का भलिभांति समायोजन किया गया है। अभिभावक बन्धु/भगिनी भी विद्याभारती की रीति-नीति से परिचित हों इस हेतु अभिभावक सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बालिकाओं के  प्रबोधन के लिए समय-समय पर अतिथियों, वक्ताओं, षिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं प्रषासनिक अधिकारियों को आमंत्रित किया जाता है।
    बहिनों के कौषल विकास की दृष्टि से उनमें उद्यमिता एवं स्वावलम्वन का भाव जागृत करने के लिए सिलाई, कढ़ाई-बुनाई चित्रकला, हस्तकला, पाककला, एवं तकनीकि षिक्षा के लिए विषेषज्ञों द्वारा प्रषिक्षण की समय-समय पर व्यवस्था की जाती है आत्म-रक्षा की दृष्टि से बालिकाओं को जूडो-कराते, ताईक्वांडो आदि का प्रषिक्षण भी दिया जाता है।
बालिकाओं की उपलब्धियाॅंः-
क्रीड़ा के क्षेत्र में:- इस वर्ष 140 बहिनों में से 120 बहिनों ने खेलों में भाग लिया जिनमेें- खो-खो, कबड्डी, हेन्ड-वाॅल, ताई-क्वांडों, कुंगफू आदि खेलों में प्राप्त स्तर से लेकर अखिलभारतीय स्तर तक सहभागिता की। शासकीय स्तर पर मुख्यमंत्री कप महिला कबड्डी में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जिला स्तरीय युवा उत्सव में लोक-नृत्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
बहिनों के अनौपचारिक कार्यः- दिनचर्या में नित्यप्रति प्रातः स्मरण वन्दना-प्रार्थना, यज्ञ-हवन, श्रमसाधना, नियमित शाखा एवं खेल, संध्या वंदन, जन्मोत्सव, गौ-सेवा, पक्षियों को दाना-पानी देना, पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता अभियान के कार्य बहिनों द्वारा सेवाभाव से किए जाते हंै। ज्ञानार्जन हेतु वनसंचार, देषदर्षन, सरस्वती यात्रा, सामाजिक सरोकार हेतु धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता एवं भजन संध्या के  आयोजन किए जाते  हैं।
हमारी आगामी योजनाएॅः-
ऽ स्वयंसिद्धा कौषल विकास केन्द्र का सुभारम्भ।
ऽ कम्प्यूटर षिक्षा की उत्तम व्यवस्था।
ऽ कक्षा षष्टी से द्वादषी तक डे-स्काॅलर विद्यालय का संचालन।
ऽ जैविक कृषि द्वारा रासायनिक पदार्थ रहित सब्जियों का उत्पादन।
ऽ गौ-संवर्धन हेतु गौषाला का उन्नयन।