प्रान्त शिशु वाटिका वर्ग गुना

02-Jun-2017

प्रान्त शिशु वाटिका वर्ग गुना

 विद्या भारती मध्यभारत प्रान्त शिशु वाटिका वर्ग गुना गौशाला में संगठन मंत्री श्री हितानंद शर्मा, सह संगठन मंत्री श्री अनिल अग्रबाल ,श्री रुपेश विश्वकर्मा प्रान्त प्रमुख ग्राम भारती ,श्री के.जी.राठौर ADPO उपस्तिथ थे।
 
 


शिशु वाटिका (पूर्व प्राथमिक शिक्षा)

02-Jun-2017

शिशु वाटिका (पूर्व प्राथमिक शिक्षा)

भारत में सामान्यता प्राथमिक विद्यालयों में ६ वर्ष की आयु पूर्ण होने पर बालक कक्षा प्रथम में प्रवेश लेकर अपने औपचारिक शिक्षा आरम्भ करता है. 3 वर्ष से 6 वर्ष का उसका समय प्रायः परिवार में ही व्यतीत होता है. प्राचीन काल में भारत में जब परिवार संस्था सांस्कृतिक दृष्टि से सशक्त थी उस समय बालक परिवार के स्नेहपूर्ण वातावरण में रहकर योग्य संस्कार ग्रहण कर विकास करता था. माता ही उसकी प्रथम शिक्षिका होती थी. किन्तु आधुनिक काल में औद्योगिक विकास एवं पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव विशेष रूप से नगरों में, परिवारों पर भी हुआ और इसके परिणामस्वरूप 2 वर्ष का होते ही बालक को स्कूल भेजने की आवश्यकता अनुभव होने लगी. नगरों में इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए "मोंटेसरी", "किंडरगार्टन" या नर्सरी स्कूलों के नाम पर विद्यालयों की संख्या बढ़ने लगी. नगरों एवं महानगरों के गली-गली में ये विद्यालय खुल गए और संचालकों के लिए व्यवसाय के रूप में अच्छे धनार्जन करने के साधन बन गए.
मोंटेसरी या किंडरगार्टन के नाम पर चलने वाले इन विद्यालयों में कोमल शिशुओं पर शिक्षा की दृष्टि से घोर अत्याचार होता है. भारी-भारी बस्तों के बोझ ने इनके बचपन को उनसे छीन लिया. अंग्रेजी माध्यम के नाम पर पश्चिमीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से चल रही है. देश के लिए घातक इस परिस्थिति को देखकर विद्या भारती ने पूर्व प्राथमिक शिक्षा की ओर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया. भारतीय संस्कृति एवं स्वदेशी परिवेश के अनुरूप शिशु शिक्षा पद्धति "शिशु वाटिका" का विकास किया. शिशु का शारीरिक, मानसिक, भावात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास की अनौपचारिक शिक्षा पद्धति "शिशु वाटिका" के नाम से प्रचलित हुई. अक्षर ज्ञान और अंक ज्ञान के लिए पुस्तकों और कापियों के बोझ से शिशु को मुक्ति प्रदान की गयी. खेल, गीत, कथा कथन, इन्द्रिय विकास, भाषा-कौशल, विज्ञान अनुभव,रचनात्मक-कार्य, मुक्त व्यवसाय, चित्रकला-हस्तकला, दैनन्दिन जीवन व्यवहार आदि के अनौपचारिक कार्यकलापों के माध्यम से "शिशु वाटिका" कक्षाएँ शिशुओं की आनंद भरी किलकारियों से गूंजती हैं और शिशु सहज भाव से शिक्षा और संस्कार प्राप्त कर विकास करते हैं.
विद्या भारती ने शिशुओं के साथ उनके माता-पिता एवं परिवारों को भी प्रशिक्षित एवं संस्कारित करने का कार्यक्रम "शिशु वाटिका" के अंतर्गत अपनाया है. शिशु के समुचित विकास में परिवार विशेष रूप से माता का दायित्व है. इस दायित्व बोध का जागरण एवं हिंदुत्व के संस्कारों से युक्त घाट का वातावरण निर्माण करने का प्रयास देश भर में "शिशु वाटिका" के माध्यम से हो रहा है.


शिशु वाटिका

06-Jun-2017

शिशु वाटिका

 
शिशु वाटिका (पूर्व प्राथमिक शिक्षा)


भारत में सामान्यता प्राथमिक विद्यालयों में ६ वर्ष की आयु पूर्ण होने पर बालक कक्षा प्रथम में प्रवेश लेकर अपने औपचारिक शिक्षा आरम्भ करता है. 3 वर्ष से 6 वर्ष का उसका समय प्रायः परिवार में ही व्यतीत होता है. प्राचीन काल में भारत में जब परिवार संस्था सांस्कृतिक दृष्टि से सशक्त थी उस समय बालक परिवार के स्नेहपूर्ण वातावरण में रहकर योग्य संस्कार ग्रहण कर विकास करता था. माता ही उसकी प्रथम शिक्षिका होती थी. किन्तु आधुनिक काल में औद्योगिक विकास एवं पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव विशेष रूप से नगरों में, परिवारों पर भी हुआ और इसके परिणामस्वरूप 2 वर्ष का होते ही बालक को स्कूल भेजने की आवश्यकता अनुभव होने लगी. नगरों में इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए "मोंटेसरी", "किंडरगार्टन" या नर्सरी स्कूलों के नाम पर विद्यालयों की संख्या बढ़ने लगी. नगरों एवं महानगरों के गली-गली में ये विद्यालय खुल गए और संचालकों के लिए व्यवसाय के रूप में अच्छे धनार्जन करने के साधन बन गए.

मोंटेसरी या किंडरगार्टन के नाम पर चलने वाले इन विद्यालयों में कोमल शिशुओं पर शिक्षा की दृष्टि से घोर अत्याचार होता है. भारी-भारी बस्तों के बोझ ने इनके बचपन को उनसे छीन लिया. अंग्रेजी माध्यम के नाम पर पश्चिमीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से चल रही है. देश के लिए घातक इस परिस्थिति को देखकर विद्या भारती ने पूर्व प्राथमिक शिक्षा की ओर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया. भारतीय संस्कृति एवं स्वदेशी परिवेश के अनुरूप शिशु शिक्षा पद्धति "शिशु वाटिका" का विकास किया.
 
 
शिशु का शारीरिक, मानसिक, भावात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास की अनौपचारिक शिक्षा पद्धति "शिशु वाटिका" के नाम से प्रचलित हुई. अक्षर ज्ञान और अंक ज्ञान के लिए पुस्तकों और कापियों के बोझ से शिशु को मुक्ति प्रदान की गयी.
खेल, गीत, कथा कथन, इन्द्रिय विकास, भाषा-कौशल, विज्ञान अनुभव,रचनात्मक-कार्य, मुक्त व्यवसाय, चित्रकला-हस्तकला, दैनन्दिन जीवन व्यवहार आदि के अनौपचारिक कार्यकलापों के माध्यम से "शिशु वाटिका" कक्षाएँ शिशुओं की आनंद भरी किलकारियों से गूंजती हैं और शिशु सहज भाव से शिक्षा और संस्कार प्राप्त कर विकास करते हैं.


विद्या भारती ने शिशुओं के साथ उनके माता-पिता एवं परिवारों को भी प्रशिक्षित एवं संस्कारित करने का कार्यक्रम "शिशु वाटिका" के अंतर्गत अपनाया है. शिशु के समुचित विकास में परिवार विशेष रूप से माता का दायित्व है. इस दायित्व बोध का जागरण एवं हिंदुत्व के संस्कारों से युक्त घाट का वातावरण निर्माण करने का प्रयास देश भर में "शिशु वाटिका" के माध्यम से हो रहा है


शिशु वाटिका की विकास यात्रा

06-Jun-2017

शिशु वाटिका की विकास यात्रा

 
विद्याभारती मध्यभारत प्रान्त में नमूना रूप शिशु वाटिका शिक्षा की विकास यात्रा

प्रथम चरण-

विद्या भारती शिशु शिक्षा की मूल अवधारणा के क्रियान्वयन हेतु विद्याभारती मध्यभारत प्रान्त में नमूनारुप
शिशुवाटिका शिक्षा के केन्द्र प्रारम्भ करने की दृष्टि से सर्वप्रथम प्रान्त के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के मध्य चयनित केन्द्र गुजरात माॅडल के आधार पर प्रारम्भ करने का निश्चय किया गया। जिसके प्रथम सोपान में प्रान्त के इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले ज्येष्ठ कार्यकर्ता पूर्णकालिक व शिशुवाटिका के प्रान्त एवं विभाग प्रमुख दीदियों को कुल 22 बंधु-भगिनी को सूचीबद्ध कर 24 जनवरी से 2 फरवरी 2014 तक गांधीधाम गुजरात जाकर आदर्श शिशुवाटिकाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके पूर्व विद्याभारती की संकल्पना अनुसार बस्ता विहिन क्रिया आधारित एवं संसाधन युक्त शिशुवाटिकाओं के क्रियान्वयन की दृष्टि से प्रान्त संगठन मंत्री की उपस्थिति में प्रान्त प्रमुख श्री रामकुमार भावसार, क्षेत्रीय शिशुवाटिका प्रमुख श्री हुकुमचन्द जी भुवन्ता एवं चयनित विद्यालय ग्लोरियस विद्यालय की प्रबंध समिति के तीन कार्यकर्ता कुल 7 कार्यकर्ताओं द्वारा गांधीधाम गुजरात जाकर केन्द्र का प्रत्यक्ष अवलोकन कर विषय की महत्ता से परिचित हुए।

द्वितीय चरण-

प्रथम चरण में अवलोकन उपरान्त प्रान्त में 6 स्थान चयनित किये गये। जिसमें स.वि.मं. बादलगढ़  (ग्वालियर), स.वि.मं. अस्पताल चैराहा (शिवपुरी), स.वि.मं. गोविन्द नगर (होशंगाबाद), स.वि.मं. शारदा विहार
(भोपाल), स.वि.मं. ग्लोरियस एकेडमी (भोपाल), स.वि.मं. टेमागांव (हरदा) का चयन किया। विद्याभारती अखिल भारतीय योजना से गुजरात प्रान्त में शिशुवाटिका विषय की 5 दिवसीय परिषद की बैठक सूरत में सम्पन्न हुई जिसमें केन्द्र की विशेष अनुमति से प्रान्तीय संगठन मंत्री, श्री रामकुमार भावसार (प्रान्त प्रमुख), श्री अवधेश त्यागी (विभाग समन्वयक एवं प्रान्त शिशुवाटिका प्रभारी), श्री हुकुमचन्द भुवन्ता (क्षेत्रीय शिशुवाटिका प्रमुख) 27 फरवरी से 3 मार्च 2015 तक वर्ग में सम्मिलित हुए एवं 0 से 5 वर्ष की शिशु शिक्षा के भारतीय स्वरूप को समझा गया तथा प्रान्त में क्रियान्वयन की दृष्टि से आचार्य व अभिभावकों के प्रशिक्षण के लिए साहित्य क्रय किया गया। इसी वर्ग में शिशुवाटिका की राष्ट्रीय संयोजिका बहिन आशा थानकी के सानिध्य में प्रान्त के चयनित विद्यालयों का प्रान्तीय प्रशिक्षण वर्ग (5 दिवसीय) 25 से 31 जुलाई 2015 तक गोविन्द नगर (होशंगाबाद) में तय किया गया। इस वर्ग की योजना हेतु श्री हुकुमचन्द भुवन्ता, श्रीमती सुरेखा ठाकुर एवं श्रीमती रीता सावरकर ने गुजरात माधव विद्यापीठ जाकर सुश्री आशाबेन थानकी जी के सानिध्य में वर्ग पाठ्यक्रम एवं कार्ययोजना का निर्माण किया गया।

तृतीय चरण-

‘‘नमूना रूप शिशुवाटिका प्रान्तीय प्रशिक्षण’’ पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार 25 से 31 जुलाई 2015 के मध्य सरस्वती विद्या मंदिर गोविन्द नगर में प्रान्त की 16 चयनित शिशुवाटिकाओं से 29 एवं अन्य प्रान्तों से 12 दीदी आचार्य कुल वर्ग में 41 संख्या उपस्थित रही। इस वर्ग में सुश्री आशाबेन थानकी ने पूरे समय उपस्थित रहकर 12 शैक्षिक आयाम का स्वरूप क्रिया आधारित प्रशिक्षण सम्पन्न कराया। इस प्रशिक्षण वर्ग में मा. काशीपति जी राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री, मा. श्री रामजी अरावकर राष्ट्रीय मंत्री, श्रीमान भालचन्द्र जी रावले क्षेत्रीय संगठन मंत्री, मध्यभारत प्रान्तीय संगठन मंत्री, श्री पवन जी तिवारी, संगठन मंत्री महाकौशल प्रान्त, श्री हितानन्द जी शर्मा, अनिल जी अग्रवाल सहसंगठन मंत्री, श्री अखिलेश जी मिश्र सहसंगठन मंत्री मालवा प्रान्त की विशेष उपस्थिति रही। वर्ग के अन्तिम दो दिवस में विद्यालयों की प्राचार्य एवं व्यवस्थापक बन्धुओं को भी आमंत्रित किया गया। बनखेड़ी विद्यालय के मातृसम्मेलन में 1150 माताओं की प्रभावी उपस्थिति में बहिन आशा थानकी द्वारा माताओं को शिशु शिक्षा की दशा एवं दिशा पर प्रबोधन दिया। वही वर्ग समापन पर ख्याति प्राप्त कलाकार बाबा सत्यनारायण मौर्य जी ने शिशुवाटिका केन्द्रित कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित लगभग 4500 बंधु भगिनियों का मन मोह लिया। इसी अवधि में श्रेष्ठ संतान प्राप्ति  का विज्ञान -नव दम्पति का प्रशिक्षण भी सम्पन्नहुआ. जिसमे  41 दम्पत्ति उपस्थित हएु । साथ ही गर्भवती माताओं का प्रशिक्षण, जिसमें 21 माताओं ने उपस्थित होकर बहिन आशाबेन थानकी के विचारों को सुना एवं क्रियान्वयन करने का संकल्प लिया तथा प्रतिमाह इसका प्रशिक्षण प्रारम्भ हुआ।

चतुर्थ चरण-

नमूना रूप शिशुवाटिका प्रशिक्षण के उपरान्त प्रान्त के 6 चयनित विद्यालय- बनखेड़ी, शारदाविहार, कोटरा भोपाल, शिवाजी नगर भोपाल, ग्लोरियस एकेडमी भोपाल, कालापाठा बैतूल विद्यालयों में सत्र 2015-16 में पुष्य नक्षत्र में 6 बार में लगभग 3500 शिशुओं को ‘‘सुवर्ण प्राशन’’ पिलाया गया। जिसमें गोविन्द नगर विद्यालय से इस योजना का शुभारम्भ किया गया।

पंचम चरण-

नवदम्पत्ति एवं गर्भवती माताओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 व 2 दिसम्बर 2015 को शारदा विहार परिसर भोपाल में भोपाल महानगर का आयोजित किया गया। जिसमें दोनो दिवस सुश्री आशाबेन थानकी जी का मार्गदर्शन
प्राप्त हुआ जिसमें नवदम्पत्ति प्रशिक्षण 60 दम्पत्ति एवं दूसरे दिवस 80 गर्भवती माताओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण वर्ग में भोपाल महानगर के आयुर्वेद चिकित्सकों को भी आमन्त्रित किया गया एवं इन चिकित्सकों के साथ सुश्री आशाबेन थानकी की बैठक सम्पन्न हुई। इसी चरण में आगामी समय में गोविन्द नगर (होशंगाबाद), शारदा विहार (भोपाल), शिवाजी नगर (भोपाल), कोटरा (भोपाल), में विषय की योजनानुसार नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न करने की योजना की गई।

षष्ठम् चरण-

प्रशिक्षण एवं ‘‘सुवर्ण प्राशन’’ योजना के साथ-साथ शिशुवाटिका साहित्य निर्माण की योजना का विचार प्रान्त
के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने किया। जिसके अनुसार विद्याभारती केन्द्र की विशेष अनुमति से शिशुवाटिका का 13 विषयों का साहित्य जो कि मूल गुजराती भाषा में लिपिबद्ध है, उसे केन्द्र की विशेष अनुमति से मातृभाषा हिन्दी में मुद्रण करानेकी स्वीकृति प्राप्त हुई। जिसके परिपालन में प्रान्त का ‘शारदा प्रकाशन’ के माध्यम से 13 पुस्तकें जिसमें -

1. समर्थ शिशु नामावली - 1000
2. बच्चों के साथ खेले खेल - 1000
3. समग्र विकास प्रतिमान - 100
4. शिशुवाटिका भारतीय संकल्पना - 1000
5. षोडष संस्कार शिशुवाटिका - 2000
6. विद्यारम्भ संस्कार - 1000
7. शिशु नगरी कैसी हो - 2000
8. कक्षा उदय पाठ्यक्रम एवं क्रियाकलाप - 1000
9. कक्षा अरूण पाठ्यक्रम एवं क्रियाकलाप - 1000
10. माँ की पावन गोद में - 5000
11. भवन निर्माण - 100
12. समग्र विकास अभ्यासक्रम (कक्षा 1 से 8) - 1000
13. आचार्य शिक्षण एवं प्रशिक्षण योजना - 100

आदि साहित्य का मुद्रण कार्य पूर्णता की ओर है। साहित्य की विधिवत विमोचन शिशुवाटिका राष्ट्रीय परिषद बैठक में होगा।

सप्तम चरण (आगामी योजना )-

सक्षम परामर्श टोली योजना अन्तर्गत प्रान्त के 8 चयनित केन्द्रों से 9 परामर्शक वैद्य (आयुर्वेदिक चिकित्सक)
एवं 12 विषय संयोजक, सहयोगी कार्यकत्र्ता दिनांक 27 से 31 जनवरी 2016 तक जामनगर गुजरात में ‘गर्भ विज्ञान’प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। जिसके पंजीयन आदि की आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है।

‘‘नमूना रूप शिशुवाटिका के विकास एवं विस्तार हेतु श्री हुकुमचन्द जी भुवन्ता (क्षेत्र विषय प्रमुख) के सहयोग
हेतु प्रान्त से पूर्णकालिक श्री अवधेश त्यागी (विभाग समन्वयक) को प्रान्त विषय प्रभारी व श्रीमती सुरेखा ठाकुर (प्रान्त प्रमुख), श्रीमती नम्रता तिवारी (सह प्रान्त प्रमुख) एवं श्री रतन सिंह मालवीय (प्राचार्य, सह प्रान्त प्रमुख) के रूप में दायित्व देकर टोली निर्माण की गई। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में ‘‘नमूना रूप शिशुवाटिका’’ कार्यविस्तार एवं क्रियान्वयन की दृष्टि से श्री गोपाल सोनी (संभाग प्रभारी) को ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा के शिशुवाटिका प्रान्त प्रमुख का दायित्व दिया गया।

शिशु शिक्षा के इन नवीन प्रयोगों के आधार पर इस कार्य में लगे कार्यकर्ताओं का मनोबल, आत्मविश्वास बढ़ा
साथ ही यह भी ध्यान में आया कि लवकुश, धु्रव, प्रहलाद, सीता और सावित्री जैसे तैयार करने के लिये श्रेष्ठतम विचार का यह मूल कार्य है तथा समाज में इस विचार की स्वीकार्यता बढ़ रही है। शिशुवाटिका विभाग केन्द्रिय मार्गदर्शन से प्रान्त में इस विषय पर और चिन्तन कर प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन का स्वरूप तैयार किया जावेगा।
 


नमूनारूप शिशुवाटिका

06-Jun-2017

नमूनारूप शिशुवाटिका

नमूनारूप शिशुवाटिका-

विद्या भारती के सामान्य विद्यालयों में 3 वर्ष से अधिक आयु के भैया-बहिन अध्ययनरत हैं। इससे आगे बढ़ते हुए 0 से 5 वर्ष की शिक्षा (नवदम्पतियों को भावी संतति के लिए परामर्श केन्द्र) भी प्रान्त के तीन केन्द्रों पर अब प्रारम्भ किए है। 
(1) स.शि.मं. गोविन्द नगर 
(2) स.शि.मं. शिवाजी नगर, भोपाल 
(3) स.शि.मं. भारत भारती बैतूल 
 
में चलने वाले इन परामर्श केन्द्रों पर नवदम्पतियों को नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी है एवं प्रान्त के चयनित 18 केन्द्रों पर क्रिया आधारित शिक्षण की व्यवस्था नमूनारूप शिशुवाटिका में की जा रही है।


शैक्षिक व्यवस्था

06-Jun-2017

नमूनारूप शिशुवाटिका

शैक्षिक व्यवस्था

 
12 शैक्षिक व्यवस्था
क्र. शैक्षिक व्यवस्था
1 चित्र पुस्तकालय
2 विज्ञान प्रयोगशाला
3 वस्तु संग्रहालय
4 कलाशाला
5 कार्यशाला
6 बगीचा
7 घर
8 क्रीडागन
9 चिडि़याघर
10 तरणताल
11 रंगमंच
12 प्रदर्शनी कक्ष


शिशुवाटिका फोटो

06-Jun-2017

शिशुवाटिका फोटो

 
 
 

 

 










 


शिशुवाटिका क्षेत्रीय परिषद

06-Jun-2017

शिशुवाटिका क्षेत्रीय परिषद

 
शिशुवाटिका क्षेत्रीय परिषद
क्रं.  नाम   दायित्व  स्थान 
  मालवा प्रांत     
1 श्री सुन्दर लाल शर्मा  शिशुवाटिका विषय प्रभारी  मन्द्सौर 
2 शिशुवाटिका प्रांत प्रमुख     
3 शिशुवाटिका प्रांतीय परिषद सदस्य     
4 शिशुवाटिका प्रांतीय परिषद सदस्य     
5 शिशुवाटिका प्रांतीय परिषद सदस्य     
  मध्यभारत प्रांत     
1 श्री भालचन्द्र जी रावले  क्षेत्रीय संगठन मंत्री मध्यक्षेत्र  भोपाल 
2 श्री हुकुमचन्द भुवंता  क्षेत्रीय शिशुवाटिका प्रमुख  गोविन्द नगर 
3 श्री हितानन्द जी शर्मा  संगठन मंत्री मध्य भारत  भोपाल 
4 श्री अनिल जी अग्रवाल  सह संगठन मंत्री मध्यभारत  गोविन्द नगर 
5 श्री रामकुमार जी भावसार  प्रांत प्रमुख  भोपाल 
6 श्री रुपेश जी विश्वकर्मा  प्रांत प्रमुख ग्राम भारती  भोपाल 
7 श्रीमती सुरेखा ठाकुर  शिशुवाटिका प्रांत प्रमुख  कालापाठा बैतूल 
8 श्रीमती नम्रता तिवारी  शिशुवाटिका सह प्रांत प्रमुख  हर्षवर्धन नगर , भोपाल  
9 श्री रतन सिंह मालवीय  शिशुवाटिका सह प्रांत प्रमुख  हर्षवर्धन नगर , भोपाल  
10 श्री गोपाल जी सोनी  शिशुवाटिका प्रांत प्रमुख ग्रा.भा. ब्यावरा 
11 श्री भागीरथ कुमरावत  संयोजक समग्र विकास  भोपाल 
12 श्री राकेश शर्मा  समग्र विकास  भोपाल 
13 श्री राजेंद्र परमार  समग्र विकास  भोपाल 
14 शिशुवाटिका प्रांतीय  परिषद सदस्य    
  महाकौशल प्रांत     
1 श्री विवेक शैन्ड्ये  क्षेत्रीय मंत्री  दमोह 
2 श्री प्रभात सिंह जी  शिशुवाटिका सह क्षेत्रीय प्रमुख  सतना 
3 श्रीमती संतोषी सोनी  शिशुवाटिका सह प्रांत प्रमुख   डिण्डोरी
4 शिशुवाटिका प्रांतीय  परिषद सदस्य       
5 शिशुवाटिका प्रांतीय  परिषद सदस्य       
6 शिशुवाटिका प्रांतीय  परिषद सदस्य       
  छ्त्तीसगढ प्रांत     
1 श्री निरंजन जी शर्मा  सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री  रायपुर 
2 श्रीमती हंसा राठी  शिशुवाटिका प्रांत प्रमुख  भाटापारा 
3 श्री रामकुमार जी वर्मा  शिशुवाटिका विषय प्रभारी  दुर्ग 
4 शिशुवाटिका प्रांतीय  परिषद सदस्य       
5 शिशुवाटिका प्रांतीय  परिषद सदस्य       
6 शिशुवाटिका प्रांतीय  परिषद सदस्य